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कॉलेज के

ठीक बाद

एक हिंदी उपन्यास जो कॉलेज के बाद की ज़िंदगी की सच्चाई दिखाता है ।

स्कूल ने सिखाया कि दुनिया कैसी होनी चाहिए।
कॉलेज ने दिखाया कि दुनिया वास्तव में कैसी है।

और कॉलेज के ठीक बाद —
हमें अकेला छोड़ दिया गया
इस वास्तविक दुनिया से लड़ने के लिए।

College ke theek baad hindi novel book cover by Subhash Verma
• Contemporary Fiction • Post-College Reality • हिंदी साहित्य • यथार्थवादी लेखन • हिन्दी युवा साहित्य • युवा पीढ़ी की आवाज़ • Contemporary Fiction • Post-College Reality • हिंदी साहित्य • यथार्थवादी लेखन • हिन्दी युवा साहित्य • युवा पीढ़ी की आवाज़
college ke theek baad contemporary hindi fiction novel


“यह कहानी उन युवाओं की है जो आदर्शों का चोला ओढ़े डिग्री लेकर बाहर निकले हैं ।”

लेकिन ज़िंदगी ने

सवाल पूछना शुरू कर दिया

दोस्त बदल गए — जो साथ थे, वे अजनबी हो गए

सपने डर में बदल गए — जो चाहते थे, वह दूर लगने लगा

और जवाब कहीं नहीं मिले — किताबों में नहीं, अनुभव में मिले

अगर आपने यह दौर जिया है,
तो यह किताब आपको पढ़ेगी

कॉलेज के ठीक बाद

प्रसिद्ध हिंदी लेखक सुभाष वर्मा का contemporary Hindi novel

यह उपन्यास कॉलेज के बाद की उस मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक यात्रा को उजागर करता है जिसके लिए हमें कोई तैयार नहीं करता।

“यह किताब उन लाखों युवाओं की आवाज़ है
जो समझदार थे, लेकिन अनुभवहीन।”

एक ऐसी दुनिया
जो सपनों से बुनी थी

कॉलेज से पहले हम एक ऐसी दुनिया बुनते हैं जो हमारे सपनों, उम्मीदों और आदर्शों से मेल खाती है।

स्कूल हमें वास्तविक दुनिया नहीं सिखाता —
वह हमें सिखाता है कि दुनिया कैसी होनी चाहिए।

किताबों में पढ़ा गया आदर्शवाद हमें यह विश्वास दिलाता है कि ईमानदारी, वादे और सिद्धांत ज़िंदगी के मूल स्तंभ हैं।

दो दुनियाओं का
संघर्ष

1️⃣ वह दुनिया –
जिसके हमने सपने बुने,
जिसे किताबों में पढ़ा।

2️⃣ वह दुनिया –
जो वास्तव में है,
जहाँ आदर्शवाद प्रतीकात्मक है
और दौड़ वास्तविक।

इसी रणक्षेत्र में
कुछ रणछोड़ बनते हैं,
कुछ अभिमन्यु,
और कुछ मैदान अपने नाम करते हैं।

दुनिया कैसी होनी चाहिए
और
दुनिया कैसी है

इन दोनों के बीच का सफर है —
कॉलेज के ठीक बाद ।

यह हर उस युवा के लिए है जिसने सवाल पूछे हैं ।

अगर आपने कभी सोचा है कि “अब क्या?”, “यह सब क्यों?”, “मैं अकेला क्यों हूँ?” —
तो यह किताब आपकी है।

सुभाष वर्मा

भारत के 3× प्रकाशित हिंदी लेखक,
storyteller और writing mentor

एक Medical Physicist होने के साथ-साथ उन्होंने हिंदी साहित्य में यथार्थवादी और मानवीय लेखन को पहचान दिलाई।

“कॉलेज के ठीक बाद”
उनकी अब तक की सबसे प्रासंगिक और पीढ़ी-विशेष की रचना है।

3

प्रकाशित पुस्तकें

5+

वर्षों का लेखन

10K+

पाठक

author Subhash Verma

क्या यह किताब आत्मकथा है?

नहीं। यह contemporary fiction है, लेकिन भावनाएँ वास्तविक हैं। यह कई युवाओं के अनुभवों का मिश्रण है।

क्या यह कॉलेज छात्रों के लिए है?

हाँ, खासकर 16–30 वर्ष के युवाओं के लिए जो कॉलेज में हैं या कॉलेज से निकल चुके हैं।

क्या यह लेखक की पहली किताब है?

नहीं। यह लेखक की तीसरी प्रकाशित पुस्तक है। उनकी पिछली दो किताबें भी हिंदी साहित्य में सराहनीय रही हैं।

किताब कब उपलब्ध होगी?

Amazon और Flipkart पर उपलब्ध है ।

अगर यह कहानी
आपको छूती है,

तो हो सकता है आपकी कहानी भी
लिखे जाने के काबिल हो।